अगर कोई कर सकता है तो मैं क्यों नहीं 
क्या है उनमें ऐसा जो मुझ में नहीं 
झांक ले अपने भीतर खुद से या पूछ ले 
कैसी चाहिए जिंदगी खुली आंखों से देख ले 
मुठ्ठियों को भींचकर सांसो को खींचकर 
सब से टकराने को शिखर पर जाने को 
मैं तैयार हूं मैं तैयार हूं ............












मुश्किलें हो कैसी भी मेरे हौसलों से कम है 
हौसलों को चीर देंगे हां इतना दम है 
आओ हाथ बढ़ाएं कुछ करके दिखाना है 
सारे बाहानो को आज से आग लगाना है 
मुठ्ठियों को भींचकर सांसो को खींचकर 
सब से टकराने को शिखर पर जाने को 
मैं तैयार हूं मैं तैयार हूं ......













खुद से है यह वादा कुछ करके जाऊंगा 
सब के सीनों को गर्व से भर के जाऊंगा 
चढ़ते सूरज को सलाम करती दुनिया सारी 
आज से मेरा यह जीवन मेरी जिम्मेदारी 
मुठिया को बेचकर सांसो को खींचकर 
सब से टकराने को शिखर पर जाने को 
मैं तैयार हूं ...मैं तैयार हूं....

-साभार उज्जवल पाटनी जी